Wednesday, March 1, 2017

HOLD HAND O FATHER

हाथ धरो फिर तुम पिता हमारे ।
हम बालक कही छूट न जा रे ॥१ ॥

दिखाने लाये हो जगका मेला  ।
हँसाये रुलाये वो दिखानेवाला  ॥ २ ॥

एक पल आँखे न चाहे मिटना ।
क्या क्या देखे कुछ छूट न जाना  ॥ ३ ॥

चलत  रुकत दौड़त पग भागे ।
चाहत है देखन क्या आगे आगे ॥ ४ ॥

तेरे होते हमें बुलाये क्यों कोई शैतान  ।
बदनामी तो तेरी होगी हम तेरे संतान ॥ ६ ॥

बिना ढूंढते सामने आते बार बार ललचाते  ।
बुरा करते फिर पछताते ऐसा हम क्यों होते  ॥ ७ ॥

तेरा छोड़ू किसका पकड़ू भीड़ बड़ी दुनोयामे  ।
गायब हो कहा प्रभु  तुम आवत ना समझमें  ॥ ८ ॥

कान सुनत रहे कंठ गावत जहां हो तेरा सूर  ।
सुनीको अनसुनी कर दो जहाँ हुए बेसूर  ॥ ९ ॥

डर पावत है  खो जावत है बालक है हम तेरे ।
बार बार फिर हाथ पकड़ ले मालिक तुम हमारे  ॥ १० ॥












No comments:

Post a Comment